आई विल सरवाइव (मैं बच जाऊंगा) एक ऐसी दास्ताँ है जो यूपी के एक छोटे से गाँव से शुरू होकर कैंसर के उस मोड़ तक पहुँचती है जिसने सब कुछ बदल दिया। एक ऐसे परिवार में जन्म हुआ जहाँ बेटियों को बोझ और बेटों को बस नसीब माना जाता था। बचपन माँ की बेपनाह मोहब्बत में बीता, पर 2008 में एक साँप के डसने से हुई माँ की अचानक मौत ने उसकी दुनिया उजाड़ दी। सीआरपीएफ कैंप की नई जिंदगी और नई माँ के साथ तालमेल बिठाने की जद्दोजहद के बीच उसने पढ़ाई में अपना सुकूँ ढूँढा। वो स्कूल का हेड बॉय बना और फिर एएमयू पहुँचा, अपने आईएएस बनने के ख्वाब के पीछे। जब लगा कि जिंदगी संवर रही है, तभी 2024 के रमज़ान में कैंसर ने दस्तक दी।
आई विल सरवाइव (मैं बच जाऊंगा) सिर्फ़ एक बीमारी की कहानी नहीं है; ये दास्ताँ है उस हिम्मत, उस ग़म और उस न टूटने वाले जज़्बे की, उस लड़के की, जो कैंसर के आने से बहुत पहले से ही जिंदगी की जंग लड़ना सीख चुका था।
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